Saturday, December 17, 2011

ज़िन्दगी

हर सुबह से शाम में

ज़िन्दगी रूप बदलती है

कुछ नए मुकाम पाने की चाह में

कई रास्ते बदलती है


हर पल भागती, इस ज़िन्दगी के सफ़र में

कई अनजान हमसफ़र बनते हैं

कुछ साथ-साथ चलते हैं

कुछ राह बदल लेते हैं


बस युहीं चलते-चलते

ढल जाती है ज़िन्दगी

औरों से मिलते बिछड़ते

खुद से ही रह जाते हैं अजनबी


3 comments:

  1. Very nice... mummy too read it...& she liked it very much.

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  2. Shining Star!!! Ubharta hua sitara....

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