Thursday, May 28, 2015

रूठना-मनाना

रूठने-मनाने का सिलसिला कुछ ऐसा चल पड़ा,
वो रूठते रहे और हमारा मनाना ना थमा।


करवट

चादर की सिलवटें बयां करती हैं,
कि रातभर यहाँ ख़्वाबों ने करवट बदली है।

Tuesday, January 13, 2015

कहानियाँ


जो कभी पढ़ना हो अनकही कहानियाँ
तो किसी की ज़िन्दगी के पन्ने पलटा के देखना
क़िताबों से ज़ादा बेशक़ीमती कहानियाँ मिलेंगी

Thursday, January 8, 2015

कजरारे

कजरारे तेरे नैनों की
ज़ुबाँ हमें भी सीखा दे
हँसी -हँसी में कहीं
ये धोखा ना दे दें

Friday, December 26, 2014

Reaching You



When I come to you,
I come with nothing.
And when I come back,
I have everything.

निशां

शब्दों की गहराइयों में,
ख़यालों के मोती मिलते हैं.
कुछ गुज़रे हुए,
कुछ आनेवाले,
वक़्त के निशां मिलते हैं.

Wednesday, December 24, 2014

मायने

जब लव्ज़ बेमाने हो जाएं तो,
मायनों के भी मायने बदल जाते हैं.
जब अपने बेगाने हो जाएं तो,
बेगाने अपने से लगते  हैं.