Monday, July 9, 2012
हम सब
अपने ही ख्यालों की
कशमकश में फंसे हैं
ज़िन्दगी सुलझाने की
उधेड़बुन में लगे हैं
होना होता है जो
वो तो होता ही है
हम सब तो बस
अपनी चाहतों में बंधे हैं हम तो हैं माटी
जिस रूप में ढालोगे
ढल जाएँगे
जिस रंग रंगोगे
रंग जाएँगे
हम तो माटी हैं
तेरे हाथों की
जो चाहोगे
बन जाएँगे Saturday, May 5, 2012
क्यूँ
क्यूँ अपने ही हाथों से
खुदको जकड़ रखा है
क्यूँ अपनी ही सोच में खुदको कैद कर रखा है
दुनिया ने तो सबको दिया है हक़
सबको खुल के जीने का
क्यूँ तूने खुदको
दुनियावालों तक समेट रखा है
Saturday, January 21, 2012
Monday, January 9, 2012
Sunday, January 8, 2012
तुझे ताके मेरी अँखियाँ
तेरी राह तकती
खड़ी अखियाँ
तू आए तो करूँ
तुझसे बतियाँ
फिर न आया जो आज भी तू
तो फिर जागते हुए बीतेगी रतिया
खड़ी अखियाँ
तू आए तो करूँ
तुझसे बतियाँ
फिर न आया जो आज भी तू
तो फिर जागते हुए बीतेगी रतिया
आदत
तू मोहोबत नहीं
इबादत है मेरी
हर लम्हे से जूझने की
ताकत है मेरी
तू शख्स बनके तो साथ नहीं मेरे
फिर भी साँसों की तरह, तू आदत है मेरी
इबादत है मेरी
हर लम्हे से जूझने की
ताकत है मेरी
तू शख्स बनके तो साथ नहीं मेरे
फिर भी साँसों की तरह, तू आदत है मेरी
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